सोमवार, 1 मई 2023

मूलांक 8

 मूलांक 8

मूलांक आठ अंक ज्योतिष का आठवां अंक है।  इसका स्वामी गृह शनि है। जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी मास की 8, 17 या 26 तिथियों में हुआ हो वो इस मूलांक के प्रभाव में आते हैं। परन्तु यदि उनका जन्म -दिन 21 दिसम्बर  से लेकर 26 जनवरी या 26 जनवरी से 19 -26 फरवरी तक पड़ता हो तो उक्त तारीखों में उत्पन्न व्यक्तियों पर इस अंक का अधिक प्रभाव होता है। 21 दिसम्बर से 26 जनवरी तक के समय में पैदा हुए व्यक्तियों के लिए यह अंक विशेष अनुकूल होता है , जबकि 26 जनवरी से 19 -26 फरवरी तक के लिए शनि का समय अनुकूल नहीं होता।  शनि के प्रभाव में होने के कारण इन व्यक्तियों में अन्य मूलांक वाले व्यक्तियों की अपेक्षा कुछ विशेष गुण पाए जाते हैं। 

अंक 8 की व्याख्या करना बड़ा कठिन है , क्योंकि इसका  सम्बन्ध भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लोकों से है। यह बिल्कुल उसी प्रकार है जैसे दो गोल दायरों की लकीरें एक -दूसरे को छूती हुई चलती हों। 


इस अंक वाले व्यक्तियों के प्रति प्रायः लोगों की गलत धारणाएं होती हैं और यही कारण है कि अंक 8 वाले व्यक्ति अपने -आपको अकेला अनुभव करते हैं। 

मूलांक आठ वाले व्यक्ति स्वभाव के गम्भीर , धैर्यवान , विद्वान एवं सदाचारी होते हैं। इन व्यक्तियों के हृदय में मानव मात्र के लिए प्रेम एवं भाईचारे की भावना होती है। 

ऐसे व्यक्ति बहुत दृढ़ स्वभाव के होते हैं। इनमें अपने व्यक्तित्व की शक्ति होती है। वे जीवन के रंगमंच पर महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं ,जिसे प्रायः भाग्य से सम्बन्धित माना जाता है। ऐसे व्यक्ति दूसरों के लिए प्रायः सौभाग्यशाली सिद्ध होते हैं। 

ये व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते और सदैव कठिन परिश्रम के बल पर निरन्तर आगे बढ़ते जाते हैं। 
यदि इनका झुकाव धर्म की ओर हो तो वे उसकी चरम सीमा तक पहुंचते हैं और उनका उत्साह धर्मान्ध के रूप में प्रकट होता है। ऐसे व्यक्ति यदि कोई कार्य अपने जिम्मे ले लेते हैं तो उसका कितना भी विरोध हो , वे उसे पूर्ण करके ही रहते हैं, परन्तु उनकी इसी हठधर्मी के कारण अनेक व्यक्ति उनके शत्रु भी बन जाते हैं। 

ये व्यक्ति अपने विचारों से शीघ्र ही दूसरों को प्रभावित कर लेते हैं और यही इनकी सफलता का प्रमुख कारण होता है। 

उन्हें देखने से ऐसा पता लगता है कि उनकी किसी बात में कोई विशेष रुचि नहीं है। वे अपनी रुचियां प्रकट भी नहीं करते। यद्यपि दुःखी लोगों के प्रति उनके दिल में बहुत सहानुभूति होती है ,परन्तु वे अपनी भावनाओं को प्रकट नहीं करते। अन्य व्यक्ति उनके बारे में कुछ भी सोचते रहें ,उन्हें इस बात की कोई चिन्ता नहीं होती। 

अंक 8 वाले व्यक्ति या तो अत्यन्त सफल होते हैं अथवा अपने जीवन में उन्हें कभी सफलता प्राप्त नहीं होती। उनके जीवन का कोई मध्यम मार्ग नहीं होता। 

यदि उनमें कोई महत्त्वाकांक्षा जागृत हो जाए तो वे सामाजिक जीवन अथवा किसी महत्त्वपूर्ण सरकारी तथा उत्तरदायित्वपूर्ण पद की आकांक्षा रखते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत ऊंचे पद पर पहुंचते हैं परन्तु उन्हें इसके लिए बहुत कुर्बानी करनी पड़ती है। 

ऐसे व्यक्ति पीठ पीछे किसी की बुराई नहीं करते और जिसके सामने जो चाहते हैं कह डालते हैं। 

कुछ लोग इन्हें अभिमानी समझते हैं और अधिकतर इनसे कतराते रहते हैं। कुछ व्यक्ति इनके सामने ही इनका अनादर भी कर देते हैं किन्तु ये व्यक्ति इसकी परवाह नहीं करते और अपने कार्य में लगे रहते हैं। 

अंक 8 से सम्बन्धित व्यक्ति अपने सामान्य सामाजिक जीवन में प्रायः उपेक्षित रहते है और वे उस उपेक्षा को अपने लिए मानवीय न्याय के रूप में एक सजा मानते हैं , परन्तु जो भगवान् के न्याय के सदा विपरीत होती है। 

सांसारिक दृष्टिकोण से अंक 8 सौभाग्यशाली अंक नहीं माना जाता और इस अंक वाले व्यक्तियों को बड़ी कठिनाइयां , हानि और अनादर सहन करना पड़ता है। 

ऐसे व्यक्ति गहन चिन्तनशील होते हैं व्यर्थ की बातों में समय गंवाने की अपेक्षा ये व्यक्ति स्वयं में मगन रहना पसंद करते हैं। इसी कारण कुछ लोग इनके विरोधी बन जाते हैं और इन्हें हानि पहुंचाते हैं किन्तु ये व्यक्ति ऐसी बातों की परवाह ना करते हुए अपने कार्य में लगे रहते हैं। 

इस मूलांक वाले व्यक्ति समुद्र की तरह गहरे हृदय वाले होते हैं। अपने गुप्त रहस्यों को ये किसी पर प्रकट नहीं करते और किसी को अपने भेद नहीं देते और यही कारण है कि इन व्यक्तियों के मित्रों की संख्या बहुत कम होती है। 

इस मूलांक के व्यक्ति प्रायः प्रकाण्ड विद्वान , कवि , लेखक , सम्पादक या प्रकाशक होते हैं और अपने कार्य के द्वारा दूर -दूर तक प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। 

इस अंक वाले व्यक्ति के भाग्य में एक ओर जहां बड़ी कठिनाइयां , उथल -पुथल , अव्यवस्था तथा सभी प्रकार की विषमताएं आती हैं , वहीं दूसरी ओर उनके विचारों में दार्शनिकता , तन्त्र -विद्या और धार्मिक बातों की ओर ध्यान देने तथा अपने ध्येय के प्रति विचारों को एकत्र करने का झुकाव भी होता है। उसके सभी कार्यों में भाग्यवादी दृष्टिकोण प्रकट होता है तथा वह अपने ध्येय के प्रति बहुत उत्साह से कार्य करता है। 

ये व्यक्ति अपने कार्यों द्वारा स्वयं को ही नहीं बल्कि दूसरे लोगों को भी अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं। इन व्यक्तियों के हृदय में मानव मात्र के लिए दया एवं करुणा होती है। 

अंक 8 से सम्बन्धित व्यक्ति अपने -आपको अपने साथियों से भिन्न समझते हैं। आन्तरिक तौर पर वे अपने -आप को एकाकी अनुभव करते हैं। अन्य व्यक्ति प्रायः उन्हें गलत समझते हैं।  उन्हें अपने जीवन में किए हुए कार्यों का फल भी प्राप्त नहीं होता , लेकिन मृत्यु के बाद उनकी पूजा की जाती है , उनके कार्यों की प्रशंसा की जाती है और उनकी स्मृति में बड़ी -बड़ी श्रद्धांजलियां भेंट की जाती हैं। 

अंक 8 वाले व्यक्ति जहां एक ओर मानवीय न्याय के प्रति संघर्षरत रहते हैं वहीं , ईश्वर पर भी उनका अगाध विश्वास होता है। ऐसे व्यक्तियों का जीवन प्रायः दुःखान्त ही होता है। 

अंक 8 के व्यक्तियों को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। उनकी पहचान के लिए यह देखना चाहिए कि उनके जीवन की प्रमुख घटनाएं अंक 8 से प्रभावित हैं या नहीं , अथवा उन पर 1 , 3, और 6 के अंकों की श्रृंखलावाले अंकों का तो प्रभाव नहीं है। यदि उन पर बाद की स्थिति लागू होती है तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वे अपनी किसी पूर्वस्थिति का मूल्य चुका रहे हैं और उस स्थिति को और बढ़ा रहे हैं , जहां उन्हें प्रभु के न्याय अथवा कृपा द्वारा ही फल की प्राप्ति पर विश्वास हो। यदि इनसे विपरीत स्थिति हो तो यह समझना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति भाग्य के हाथों किसी दुर्घटना का शिकार होने वाले हैं। 


अंक 8 शनि का दिन होने के कारण शनिवार उनके लिए अधिक महत्त्वपूर्ण होता है , परन्तु उनका गौण अंक 4 होने के कारण सोमवार , शनिवार और रविवार भी महत्त्वपूर्ण बन जाते हैं। 

इन व्यक्तियों के लिए शनिवार का दिन तथा 8, 17 व  26 तारीखें विशेष शुभ होती  हैं। विशेष रूप से अंक 8 के समय जो 21 दिसम्बर से 20 -27 जनवरी तक है , उक्त तारीखों में ही अपनी योजनाएं कार्यान्वित करनी चाहिएं। यदि ये तारीखें शनिवार , रविवार या सोमवार को पड़ती हो तो और भी अच्छा रहेगा। 

अंक 8 के व्यक्तियों के लिए गहरे भूरे , काले , गहरे नीले और बैंगनी रंग शुभ माने जाते हैं। यदि अंक 8 वाले व्यक्ति हल्के रंग के कपड़े पहन लेते हैं तो वे अजनबी -से दिखाई देने लगते हैं मानो उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटी हो। 

इन व्यक्तियों के लिए नीलम शुभ रत्न है। यदि वे चाहें तो काला मोती अथवा काला हीरा भी धारण कर सकते हैं। 

अंक 8 का तान्त्रिक चिह्न न्याय की मूर्ती माना जाता है। इसके दायें हाथ में तलवार है और बाएं हाथ में तराजू। 

मूलांक 9

 मूलांक 9

नवाँ अंक , अंक ज्योतिष का अन्तिम अंक है।  इस मूलांक का स्वामी गृह मंगल को माना जाता है।  जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी मास 9 , 18 या 27 तिथियों में हुआ हो वे लोग इस मूलांक के प्रभावी क्षेत्र में आते हैं। यह प्रभाव उस समय और भी बढ़ जाता है जब व्यक्ति 21 मार्च से 19 -26 अप्रैल के दिनों में पैदा हुआ हो , जिसे मंगल का अनुकूल समय माना जाता है अथवा उसका जन्म 21 अक्टूबर से 20 -27 नवम्बर के मध्य हुआ हो , जिसे मंगल का प्रतिकूल समय माना जाता है। 


मंगल के प्रभाव में होने के कारण ये व्यक्ति अत्यंत क्रोधी होते हैं। साहस इनमें कूट -कूट कर भरा होता है और खतरों से खेलना इनके प्रिय शौक होते हैं। 

अंक 9 वाले व्यक्ति अपने सम्पूर्ण जीवन में संघर्षों से जूझते रहते हैं। उनके बचपन का समय संकटों से भरा होता है और जीवन के अन्तिम काल तक वे सफलता की ओर इसलिए बढ़ते हैं क्योंकि उनका इरादा और ध्येय दृढ़ होता है। 

ऐसे व्यक्ति स्वभाव से क्रोधी , आवेगयुक्त , स्वतन्त्र भावनाओं वाले और अपने स्वामी स्वयं होते हैं। वे किसी के अधीन रहना पसन्द नहीं करते। 

अत्यधिक क्रोधी होने के कारण इन व्यक्तियों को बुद्धिमान भी नहीं कहा जा सकता। किन्तु ये आवश्यकता से अधिक चालाक होते हैं और चतुराई से ही बड़े से बड़ा कार्य कर लेते हैं। 

अंक 9 के व्यक्ति यदि अपने क्रोध और हिंसा पर अधिकार और नियन्त्रण रख सकें तो यह अंक उनके लिए निश्चय ही सौभाग्यशाली सिद्ध होता है। 

ये व्यक्ति अविवेकी होते हैं जहाँ शांति से कार्य करना चाहिए वहीं ये अत्यंत शीघ्रता एवं जोश से कार्य करना चाहते हैं जिसके कारण कार्य अधिकतर बिगड़ जाते हैं। 

अंक 9 वाले व्यक्ति के जीवन पर तिथियों और घटनाओं का अत्यधिक प्रभाव होता है। उनके अनेक दुश्मन बन जाते हैं और उनका विरोध होने लगता है। वे या तो युद्ध के मैदान में जख्मी हो जाते हैं अथवा मारे जाते हैं। उन्हें जीवनरूपी कर्मभूमि में भी युद्ध के समान ही अनेक संकटों का सामना करना पड़ता है। 

ये अत्यंत साहसी होते हैं यदि चाहें तो बड़े से बड़ा कार्य कर सकते हैं किन्तु ये लोग कर्म में विश्वास नहीं रखते और चालाकी एवं धूर्तता से धनोपार्जन करते हैं। 

वे किसी प्रकार की आलोचना पसन्द नहीं करते। उन्हें अपने सम्बन्ध में अपनी ही धारणायें सही मालूम होती हैं। वे अपनी योजनाओं में किसी की दखलन्दाजी पसन्द नहीं करते। वे चाहते हैं कि उनकी सेवा -टहल भली प्रकार की जाये और उन्हें घर का मुखिया माना जाये। 

यदि इन व्यक्तियों के सामने इनके अवगुणों को बता दिया जाए अथवा इन्हें इनके गलत कार्य पर टोक दिया जाए तो ये उसे समझने की बजाय अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं और मार -पीट पर उतारू हो जाते हैं। 

ऐसे व्यक्ति महान् उत्साही होते हैं और उनमें श्रेष्ठ सैनिकों के गुण पाये जाते हैं। वे जिस भी क्षेत्र में काम करना चाहें , उनकी इच्छा उस क्षेत्र में नेता बनने की होती है। 

उनका सबसे बड़ा शत्रु उनका हठ होता है। वे अपने कार्यों और शब्दों पर नियन्त्रण नहीं रख पाते। उन्हें प्रायः दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ता है। ये दुर्घटनाएं प्रायः आग और विस्फोटों आदि से होती है। उनके सम्बन्ध में यह बात आम पाई जाती है की उन्हें कई आपरेशनों अथवा शल्य -चिकित्सकों के हाथों से गुजरना पड़ता है। 

घर -परिवार में भी उन्हें अनेक कठिनाइयों और संघर्षों का मुकाबला करना पड़ता है। यह संघर्ष उनके सम्बन्धियों अथवा उन रिश्तेदारों के कारण होता है जिन परिवारों में उसका विवाह होता है। 

प्रेम -सम्बन्धी मामलों में ऐसे व्यक्ति सभी कुछ कर सकते हैं। 9 अंक वाले व्यक्ति स्त्रियों के जाल में फंसकर महान् मूर्ख सिद्ध होते हैं। 

ऐसे व्यक्तियों को चाटुकारिता पसन्द होती है। यदि कोई दिन -रात इनकी प्रशंसा करता रहे तो ये बहुत प्रसन्न रहते हैं और कभी -कभी जोश में आकर दूसरे का भला भी कर बैठते हैं। यदि इनसे कोई काम निकलवाना है तो सबसे उत्तम उपाय है कि इनकी प्रशंसा की जाए जिससे ये खुश होकर जो चाहो कर देते हैं। 

ऐसा नहीं है कि ये लोग आलसी होते हैं। यदि ये चाहें तो पर्वत को उखाड़ लें , किन्तु इनका मत है कि जब बिना हाथ पैर हिलाए कार्य होते रहें तो कार्य करने की क्या आवश्यकता है। 

ऐसे व्यक्ति अच्छे साधन -सम्पन्न और संगठन के काम में बहुत प्रवीण होते हैं , परन्तु यदि वे अपने काम पर पूर्ण नियन्त्रण नहीं रख पाते तो निराश होकर एक ओर हट जाते हैं। उन्हें उन कामों के बिखर जाने की चिन्ता नहीं होती। 
ये व्यक्ति अपने अधिकार माँगने या गिड़गिड़ाने में विश्वास नहीं करते बल्कि हाथ -बढ़ाकर छीन लेते हैं। 

इन व्यक्तियों के विचार अपने ही जैसे लोगों से मिलते हैं और अपने गुणों से मिलते -जुलते एवं चाटुकार लोग इनके मित्र होते हैं। 


मूलांक 9 व्यक्तियों के लिए 9 ,18 ,27 तिथियाँ बहुत शुभ रहती हैं तथा मंगलवार का दिन उत्तम रहता है। 

इन व्यक्तियों का मेलजोल 3,6,9,12,15,18,21,24,27 और  30 तारीख को पैदा होने वाले व्यक्तियों से अधिक होता है ,क्योंकि इन सभी अंकों का 9 अंक वाले व्यक्तियों पर अनुकूल प्रभाव होता है। 

अंक 9 के व्यक्तियों के लिए किरमिची , लाल अथवा गुलाब और गिलाबी रंग के सभी शेड शुभ माने जाते हैं। 

अंक 9 वाले व्यक्तियों के लिए लाल , गारनेट और लाल रंग का रत्न सौभाग्यशाली सिद्ध होता है। यदि वे इनमें से किसी भी रत्न को धारण करेंगे तो उन्हें विशेष लाभ होगा। 

सप्ताह के मंगलवार , बृहस्पतिवार और शुक्रवार उनके लिए बहुत महत्त्वपूर्ण दिन हैं। मंगलवार का तो उनके लिए विशेष महत्त्व है क्योंकि इसे मंगल का दिन माना जाता है। 

9 अंक वाले व्यक्तियों को अपने लक्ष्य और योजनाओं की पूर्ती के लिए किसी भी माह की 9,18,27 आदि तारीखों को प्रयत्न प्रारम्भ करना चाहिए। यदि वे उक्त तारीखों में कार्य प्रारम्भ करेंगे तो उन्हें सफलता मिलेगी। यह समय  21 मार्च से 19 -26 अप्रैल तक और  21 अक्टूबर से 20 -27 नवम्बर तक होता है। यदि वे इन तारीखों को अपने अंक से सम्बन्धित दिन अथवा 3,6,12,15,21,24 और  30 तथा आपसी परिवर्तनशील दिनों में अपना कार्य प्रारम्भ करेंगे तो उन्हें अधिक सफलता प्राप्त होगी। 

मूलांक 1

मूलांक 1  1 ,10,19 एवं 28 तिथियों में जन्म लेने वाले व्यक्तियों का मूलांक 1 होता है।  अंक 1 कि सभी बातें 1,10,19 व 28 तारीखों में जन्म लेने ...